मूल भाषी – मूल या देशज भाषा भाषी से आपके अनुवाद की व्यवस्था करने के महत्व को कम कर के नहीं आंका जा सकता। सांस्कृतिक बारीकियां, मुहावरों का मर्म, स्थानीय बोलचाल के वाक्यांश और बेशक व्याकरण और शैली में महारत किसी मूल भाषा भाषी को श्रेष्ठ अनुवादक बनाती हैं।
विशेषज्ञ – जैसा पहले कहा जा चुका है कि भाषा का विशेषज्ञ होना महत्वपूर्ण है, लेकिन विषय-वस्तु की जानकारी भी अनिवार्य है। अनेक विषयों की बहुत ही विशेषीकृत तकनीकी शब्दावलियां, फॉरमैटिंग और शैलीगत विशिष्टताएं होती हैं जिन्हें कोई 'आम' अनुवादक आसानी से नजरअंदाज कर दे सकता है। बेशक इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विशेषज्ञता वाले किसी आर्मेनियाई भाषी को या फिर अर्थशास्त्र की पृष्ठभूमि वाले किसी बंगाली भाषी को ढूंढना मुश्किल हो सकता है। यहीं इंडस ट्रांसलेशन की क्षमता सामने आती है। एशिया भर के स्थानीय संपर्कों की अपनी व्यापक सूची से हमें भरोसा होता है कि बहुत संभव है कि हमारी सूची में वह भाषाविद है जो आपकी आवश्यकताओं से मेल खाता है। और अगर नहीं है, तो हम उसे बहुत हद तक पा सकते हैं।
परियोजना प्रबंधन – इंडस ट्रांसलेशन अनुवाद प्रक्रिया का संचालन उसकी संपूर्णता में - प्रारंभिक पूछताछ से ले कर अंतिम दस्तावेज तक करती है। इसमें अनुवाद के साथ ही प्रूफरीडिंग और संपादन का चरण भी शामिल होता है जिसका संचालन हमेशा कोई मूल भाषा भाषी करता है। अनुवाद उद्योग में अपने वर्षों के अनुभव से हमें पता है कि कोई समयसीमा कैसे तय और पूरी की जाती है और कैसे किसी परियोजना को शुरू से आखिर तक संचालित किया जाता है।
समनुरूप गुणवत्ता – हमारी गुणवत्ता प्रबंधन प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि हम किसी ग्राहक को जो दस्तावेज भेजते हैं उनमें से प्रत्येक हमारे कठोर गुणवत्ता मानकों को पूरा करे। इसका अर्थ है कि आप हमपर भरोसा और विश्वास कर सकते हैं कि आपको हमेशा उच्चतम स्तर का अनुवाद मिलेगा।
जानकारी – एशियाई पृष्ठभूमि के ज्यादातर लोगों पर आधारित एक कंपनी होने के नाते इंडस ट्रांसलेशन के स्टाफ और अनुवादकों के पास अपने भाषाई कौशल को संबल प्रदान करने के लिए सांस्कृतिक जानकारी है। इसका अर्थ है कि हम अपने अनुवादों को सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त और शैलीगत रूप से परिशुद्ध बना सकते हैं।
असामान्य भाषाएं – आपको चाहे कुर्दिश, कंबोडियाई या कजाख में अनुवाद की आवश्यकता हो, आप सही जगह पहुंचे हैं। इंडस ट्रांसलेशन की यह विशिष्टता है। और यह सिर्फ कुछ कम जानी पहचानी बोलियों तक सीमित नहीं है। भाषाओं की हमारी श्रंखला अब तकरीबन 60 तक पहुंच गई है जिनमें भारतीय उपमहाद्वीप की 20 भाषाएं शामिल हैं।